पूर्वोत्तर का विकास: सुरक्षा की मजबूत नींव, लुक ईस्ट पॉलिसी की ओर बढ़ते कदम

Dr Rajesh Jauhri
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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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पूर्वोत्तर भारत न केवल सांस्कृतिक विविधता का अनुपम उदाहरण है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र रहा है। शनिवार को केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों की प्रगति का जायजा लिया, जो मात्र विकास की कहानी नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से एक परिवर्तनकारी अध्याय है।

आंकड़ों के अनुसार, 2014 में 10,905 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई अब 2025 तक 16,200 किलोमीटर से अधिक हो गई है। रेलवे का 96 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, आठ नए हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं और 2014 के बाद 12 शांति समझौतों ने 10,000 से अधिक उग्रवादियों के आत्मसमर्पण का मार्ग प्रशस्त किया। बजट में उल्लेखनीय वृद्धि, 2024 तक पर्यटन का दोगुना होकर 1.28 करोड़ पर्यटकों तक पहुंचना तथा लगभग पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती, इन उपलब्धियों ने क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ को मजबूत किया है। सिक्किम विश्व का पहला पूर्णतः जैविक राज्य बन चुका है।

रणनीतिक महत्व

पूर्वोत्तर का विकास केवल स्थानीय कल्याण तक सीमित नहीं है। यह हमारी पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा का अभिन्न अंग है। 1962 के भारत-चीन युद्ध में उजागर हुई कमजोरियां और उसके बाद की दशकों की उपेक्षा ने क्षेत्र को असुरक्षित बनाया था। बेहतर सड़कें, रेल और हवाई संपर्क न केवल आर्थिक गतिशीलता बढ़ाते हैं, बल्कि सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करते हैं। यह ‘लुक ईस्ट’ नीति (अब ‘एक्ट ईस्ट’) का व्यावहारिक रूप है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को गहरा बनाती है। मजबूत पूर्वोत्तर, चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं के सामने एक विश्वसनीय ढाल के रूप में उभर रहा है।

हालांकि चुनौतियां बाकी हैं। मणिपुर में 2023 से चली आ रही जातीय हिंसा में 260 से अधिक जानें गईं और 60,000 लोग विस्थापित हुए। धन के उपयोग पर उठते सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। शांति और विकास की प्रक्रिया को अपरिहार्य रूप से जोड़ना होगा।

आगे का रास्ता स्पष्ट है, समावेशी विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सुरक्षा-आर्थिक एजेंडे का सामंजस्य। पूर्वोत्तर का उत्थान न केवल भारत की आंतरिक एकता, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए भी निर्णायक साबित होगा।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families