ऑपरेशन सिंदूर: एक वर्ष बीता, ध्वस्त हुआ था पाकिस्तान का टेरर हार्बर & दुनिया ने देखी थी भारत की ताकत

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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जयपुर में वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की उच्चस्तरीय संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित हुई है। यह आयोजन केवल स्मरण नहीं, बल्कि नई दिल्ली की स्पष्ट रणनीतिक दृष्टि का प्रतीक है, सीमा पार आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस, सटीकता और किसी भी परिस्थिति के लिए निरंतर तैयारी।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए घृणित आतंकी हमले ने 26 निर्दोष पर्यटकों की जान ली। समुदाय विशेष को निशाना बनाकर किया गया यह साम्प्रदायिक नरसंहार पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का काला अध्याय था। इसके जवाब में 7 से 10 मई 2025 के बीच भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाक अधिकृत कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नौ आतंकी शिविरों पर सटीक हवाई हमले और मिसाइल प्रहार किए। ये शिविर लंबे समय से भारत के अंदर आतंकी गतिविधियों के लॉन्च पैड रहे थे।

भारतीय बलों ने नेटवर्क-सेंट्रीक वारफेयर, रीयल-टाइम इंटेलिजेंस फ्यूजन और स्टैंडऑफ हथियारों की बढ़ती क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। हमले आतंकी नेटवर्क पर केंद्रित रहे, जिसमें आम नागरिकों और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ भारतीय सेना ने कोई कार्यवाही नहीं की। पाकिस्तान ने ‘मरका-ए-हक’ और ‘बुनयान-उल-मरसूस’ जैसे नामों से जवाबी कार्रवाई की, ड्रोन-मिसाइलों का आदान-प्रदान हुआ और युद्धविराम हॉटलाइन वार्ता से समाप्त हुआ। स्वतंत्र आकलन और भारतीय सेना द्वारा जारी की गई तस्वीरों ने आतंकी नेटवर्क के ध्वस्त होने और भारतीय सटीकता व एयर डोमिनैंस की श्रेष्ठता को रेखांकित किया।

जयपुर सम्मेलन, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत शीर्ष नेतृत्व शामिल हुए, केवल ऑपरेशन की सफलता नहीं बल्कि मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन, साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव वारफेयर, के सबकों पर केंद्रित है। यह भारत की नई सैन्य डॉक्ट्रिन को दर्शाता है: परमाणु ब्लैकमेल के बावजूद आतंक के कम्पों पर प्रहार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति। इसी इच्छाशक्ति की कमी भारत और भारतवासी कई दशकों से महसूस कर रहे थे, जो इस बार जब लोगों ने देखी तो उनका हौसला काफी बढ़ गया।

दूसरी ओर पाकिस्तान अभी भी इनकार करने, विक्टिम कार्ड खेलने और कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण का अपना वही घिसा-पिटा पुराना खेलने में लगा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा LeT-JeM पर लगाए गए प्रतिबंध और FATF द्वारा बार-बार पाकिस्तान की जांच इसकी जिहादी मिलिशियावाद को प्रायोजित करने की नीति को उजागर करती है।

पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर ने दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति को काफी मजबूत रूप में प्रदर्शित किया है। भारत ने साफ संदेश दिया है कि बार-बार उकसावे के सामने सामरिक संयम का युग समाप्त हो गया। अब जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है, अपनी सरजमीं से आतंक के नेटवर्क को पूरी तरह ख़त्म करने की। जब तक इस्लामाबाद इनकार और संरक्षण की नीति छोड़कर विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, हिंसा का चक्र जारी रहेगा और पाकिस्तान को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत ने बिलकुल साफ़ साफ़ शब्दों में कहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर समाप्त नहीं हुआ है और अभी भी जारी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर परमाणु हथियारधारी प्रतिद्वंद्वियों पर नजर रखने वाले रक्षा विशेषज्ञों के लिए मई 2025 की घटनाएं एक कठोर सबक हैं, आतंक का राज्य-प्रायोजन महंगा पड़ता है। भारत की संतुलित लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया ने न केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा की, बल्कि पाकिस्तान की दोहरी नीति की नाजुकता को भी पूरी दुनिया के सामने ला दिया।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families