भारतीय सेना की गरिमा और अनुशासन को चुनौती देने वाली एक और घटना सामने आई है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और राजद सांसद मनोज कुमार झा द्वारा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में चार व्यक्तियों, चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव, पी. नरेंद्र और शंकर सिंह गुर्जर, को मंच प्रदान किया गया। इनमें से तीन को अनुशासनहीनता के आधार पर सेना से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि चौथा एक डेजर्टर है। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संस्था के प्रति जन विश्वास को प्रभावित करने का गंभीर सवाल खड़ा किया है।
सेना की अतिरिक्त महानिदेशालय लोक सूचना (एडीजीपीआई) ने स्पष्ट रूप से तथ्य रखे हैं। चंदू चव्हाण को 25 जुलाई 2024 को पांच रेड इंक एंट्रीज के बाद डिस्चार्ज किया गया, जिनमें ड्यूटी पर नशे की हालत और बिना अनुमति राजनीतिक गतिविधियां शामिल थीं। हरेंद्र यादव को 27 जनवरी 2024 को अनुशासनहीनता के लिए बर्खास्त किया गया। पी. नरेंद्र भी इसी आधार पर सेवा से अलग किए गए। शंकर सिंह गुर्जर नवंबर 2024 से डेजर्टर घोषित है और उसके खिलाफ सैन्य व सिविल अदालतों में कार्यवाही चल रही है।
सेना का कहना है कि ये व्यक्ति अपनी गलतियों से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी कहानियां फैला रहे हैं। वे सेवा शर्तों के बारे में गलतबयानी कर रहे हैं और जानबूझकर अधिकारी-जवान विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। संजय सिंह द्वारा चव्हाण को ‘बहादुर सैनिक’ बताते हुए 2016 के उरी हमले के बाद पाकिस्तान में घुसपैठ का दावा किया गया, लेकिन सेना ने स्पष्ट किया कि ऐसे असत्यापित दावों पर भरोसा न किया जाए।
मिसइनफॉर्मेशन का खतरा
इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि वीडियो सोशल मीडिया और मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। लाखों-करोड़ों लोगों के चेतन और अवचेतन मन में यह गलत जानकारी बैठ चुकी है। हाइब्रिड युद्ध के इस दौर में, जहां दुश्मन सूचना युद्ध के माध्यम से आंतरिक विभाजन पैदा करना चाहते हैं, ऐसे प्रयास बेहद खतरनाक हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना विश्व की सबसे अनुशासित और पेशेवर सेनाओं में से एक है। अनुशासनहीनता, नशे और डेजर्शन जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करना सेना की मजबूती का प्रतीक है, न कि कमजोरी। विपक्षी सांसदों द्वारा ऐसे व्यक्तियों को मंच देकर सेना की छवि को नुकसान पहुंचाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही भी है।
देश की एकता और सशस्त्र बलों के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना आज की सबसे बड़ी रणनीतिक जरूरत है। ‘रक्षा सम्वाद’ इस आशा के साथ समाप्त करता है कि नागरिक आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और ऐसी भ्रामक प्रचार सामग्री से सतर्क रहें।


