भारतीय सेना न केवल सीमाओं की रक्षा का प्रतीक है, बल्कि मानवीय साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। 4 जून 2026 को लद्दाख में भारतीय सेना की ASC (आर्मी सर्विस कोर) माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन टीम को माउंट कांग यत्से-II (लगभग 6,250 मीटर) की चोटी फतह करने के लिए रवाना किया गया। यह अभियान 12वीं ASC रीयूनियन की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
लेफ्टिनेंट कर्नल निशांत कार्की के नेतृत्व में चार अधिकारियों और आठ जवानों की यह टीम ऊँचाई, कठिन भू-भाग और प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए शिखर पर विजय पताका फहराने का लक्ष्य रखती है। अभियान को 14वीं कोर के चीफ ऑफ स्टाफ और 72 सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने संयुक्त रूप से झंडी दिखाकर रवाना किया। यह प्रयास भारतीय सेना के उन मूल्यों को रेखांकित करता है जो युद्धक्षेत्र से लेकर हिमालय की चोटियों तक एकरूपता बनाए रखते हैं – साहस, सहनशक्ति और टीम वर्क।
भारतीय सेना के माउंटेनियरिंग इतिहास में ऐसे कई गौरवशाली अभियान दर्ज हैं। वर्ष 2025 में भारतीय सेना की टीम ने माउंट एवरेस्ट पर एक दिन में सबसे बड़ी संख्या में शिखरारोहण का विश्व रिकॉर्ड बनाया। कंचनजंघा पर नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान और अरुणाचल प्रदेश के अनचढ़े शिखर माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर पहली बार सफल चढ़ाई इन उपलब्धियों की श्रृंखला को और समृद्ध करती है। इन अभियानों ने न केवल राष्ट्रीय गौरव बढ़ाया है, बल्कि युवाओं में साहसिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित भी किया है।
इस संदर्भ में उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) का योगदान अतुलनीय है। 1965 में स्थापित यह संस्थान जवाहरलाल नेहरू की दूरदर्शिता का प्रतीक है। रक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर शुरू हुए NIM ने सेना के जवानों सहित हजारों साहसिक प्रेमियों को बुनियादी से उन्नत पर्वतारोहण प्रशिक्षण प्रदान किया है। गंगोत्री क्षेत्र की प्राकृतिक प्रयोगशाला में स्थित यह संस्थान भारतीय पर्वतारोहण को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कांग यत्से-II अभियान सेना की शारीरिक और मानसिक तैयारियों को दर्शाता है, जो आधुनिक युद्ध की जटिलताओं से निपटने में सहायक है। ऐसे प्रयास न केवल सैनिकों के कौशल को निखारते हैं, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को ‘देश सेवा’ के व्यापक आयाम सिखाते हैं। हमारी सेना की यह विरासत हमें गर्व प्रदान करती है और भविष्य की चुनौतियों के लिए प्रेरित भी।


