रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएएसवी त्रिवेणी के चालक दल का समुद्र प्रदक्षिणा अभियान के सफल समापन पर स्वागत किया। यह अभियान भारतीय सशस्त्र बलों का पहला त्रि-सेवा महिला चालक दल वाला विश्व परिक्रमा अभियान था, जिसने न केवल राष्ट्रीय गौरव बढ़ाया बल्कि सैन्य क्षमता, संयुक्तता और महिला सशक्तिकरण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अभियान के द्वारा पूरे विश्व ने भारत की सॉफ्ट पावर का लोहा माना।
लगभग 25000 समुद्री मील की दूरी तय करते हुए चार महासागरों, अटलांटिक, प्रशांत, हिंद और दक्षिणी महासागर, की चुनौतीपूर्ण यात्रा 314 दिनों में पूरी की गई। इस दल में भारतीय वायु सेना की चार महिला अधिकारी सहित अन्य सेवाओं की बहादुर महिलाएं शामिल थीं। रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि को ‘साहस, और त्रि-सेवा संयुक्तता’ का प्रतीक बताया। वायु सेना ने भी पूरे दल को बधाई दी।
यह अभियान महज एक साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। समुद्री क्षेत्र में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा, ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) और ‘इंडो-पैसिफिक’ रणनीति, के अनुरूप यह अभियान साबित करता है कि भारतीय नौसेना अब ब्लू वाटर की क्षमता के साथ-साथ विविधता और समावेशिता को भी मजबूती से अपनाए जा रही है। लंबे समय तक अलग-अलग मौसम, समुद्री तूफानों और लॉजिस्टिकल चुनौतियों का सामना करते हुए महिला अधिकारियों ने न केवल शारीरिक-मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया, बल्कि आधुनिक युद्धकला में त्रि-सेवा एकीकरण की मिसाल कायम की।
आज के हाइब्रिड युद्ध के युग में जहां संयुक्त अभियान (Jointness) और विविधता (Diversity) रणनीतिक बढ़त देते हैं, समुद्र प्रदक्षिणा जैसे कार्यक्रम सैन्य तैयारियों को नई ऊंचाई प्रदान करते हैं। यह महिला कर्मियों को कमान, नेविगेशन, संचार और आपात प्रबंधन में समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत की रक्षा व्यवस्था अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर समग्र राष्ट्रीय शक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर है। त्रिवेणी के चालक दल की यह उपलब्धि न केवल देश की बेटियों के सपनों को नई उड़ान देती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को एक सशक्त, समावेशी और समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करती है।


