अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक युद्धपोत USS जॉर्ज वाशिंगटन कल शाम को वियतनाम के दानांग बंदरगाह पर पहुंचा। यह 2023 में USS रोनाल्ड रीगन के बाद पहला अमेरिकी विमानवाहक दौरा है और वियतनाम युद्ध की समाप्ति के बाद चौथा। साथ में क्रूजर रॉबर्ट स्मॉल्स और विध्वंसक शाउप भी हैं। यह यात्रा अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ और दोनों देशों के व्यापक सामरिक साझेदारी के संदर्भ में हुई।
दशकों पहले अमेरिका और वियतनाम के बीच लंबा युद्ध चला था। उस संघर्ष में वियतनामी जनता के देशप्रेम को कई विश्लेषक निर्णायक मानते हैं। रैंबो जैसी फिल्मों ने उस काल को विश्वभर में यादगार बना दिया। आज वही दानांग बंदरगाह मित्रता का प्रतीक बन गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि जिओ-पॉलिटिक्स में शत्रुता या मित्रता स्थायी नहीं होती। उदाहरण भारत- अमेरिका सम्बन्धो या फिर ट्रम्प- मोदी के बीच के संबंधों का लीजिये, कभी ऐसा लगता था कि दोनों देशों और दोनों व्यक्तियों की केमिस्ट्री बहुत ही जबरदस्त है लेकिन आज टैरिफ वॉर के रूप में जो कुछ भी दुनिया देख रही है, वह उस सबसे बिलकुल उलट है।
यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव, फिलीपींस के साथ चीन के हालिया टकराव और इंडो-पैसिफिक में मुक्त समुद्री मार्गों की सुरक्षा की जरूरत ने दोनों देशों को करीब लाया है। 2023 में स्थापित व्यापक सामरिक साझेदारी के तहत रक्षा सहयोग, पर्सन तो पर्सन संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर बढ़ रहा है। वियतनाम अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ संतुलित संबंध विकसित कर रहा है।
लगभग छह हजार अमेरिकी नाविकों का आगमन स्थानीय संस्कृति से परिचय, खेल-कूद और सामुदायिक गतिविधियों का अवसर भी देगा। यह यात्रा इतिहास की छाया से निकलकर व्यावहारिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्रीय शांति और संतुलन को मजबूत कर सकता है।


