तेजस की उपलब्धि तो है पर डिलीवरी में विलंब पर भी उठ रहे हैं सवाल- जरुरत है आत्मनिर्भरता की राह में आ रही चुनौति यों पर गौर करने की

Dr Rajesh Jauhri
By
drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
2 Min Read

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) आज 18 सितंबर को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार करने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में एचएएल मूल 40 विमानों के ऑर्डर के अंतिम दो तेजस मार्क-1 ट्विन-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट इंडियन एयर फ़ोर्स यानि आईएएफ को सौंपेगा। साथ ही पहले एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर और पवन हंस को ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन हेलीकॉप्टर भी दिए जाएंगे। यह आयोजन भारत की एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का प्रतीक है। सैन्य प्रशिक्षण और नागरिक भूमिकाओं, जैसे एयर एंबुलेंस, के लिए स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करने का यह प्रयास सराहनीय है।

परंतु इस उपलब्धि के साथ ही एक कड़वा सच भी सामने आया है। फरवरी 2021 में 83 तेजस मार्क-1ए के लिए 46,898 करोड़ रुपये के अनुबंध के बावजूद पाँच साल सात महीने बाद भी आईएएफ के स्क्वाड्रन में एक भी मार्क-1ए शामिल नहीं हुआ है। इंजन की उपलब्धता सुधरने के बावजूद ‘इंटीग्रेशन’ संबंधी समस्याएँ बनी हुई हैं। वैज्ञानिक व इंजीनियर जो इसे विकसित करने के कार्य में लगे हुए हैं, उनको इन तकनीकी चुनौतियों से निपटने में कठिनाई हो रही है।

यह विलंब केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि जवाबदेही का मुद्दा है। क्या अनुबंध में जुर्माने के प्रावधान हैं जिस तरह से किसी प्राइवेट एजेंसी के लिए आमतौर पर होता है? क्या किसी भी तरह के जुर्माने या पनिशमेंट का क्रियान्वयन हो रहा है? मार्क-1ए की उत्पादन लाइन व्यस्त रहने से उन्नत तेजस मार्क-2 का निर्माण प्रभावित होगा। रणनीतिक दृष्टि से आईएएफ की लड़ाकू क्षमता में अंतराल बना रहना चिंता का विषय है।

आत्मनिर्भरता का सपना तभी साकार होगा जब उपलब्धियों के साथ-साथ विलंब के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। एचएएल और संबंधित एजेंसियों को समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भारत की रक्षा तैयारियाँ वैश्विक मानकों पर खरी उतरें।

Share This Article
Follow:
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families