बहरीन में 1 जुलाई को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद ने मध्य पूर्व की सुरक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्ज किया है। बहरीन डिफेंस फोर्स की मेजबानी में आयोजित इस बैठक में 12 देशों के वरिष्ठ सैन्य कमांडर शामिल हुए, जिसमें बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल थे।
CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट कहा, “हम अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।” बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण, रक्षा सहयोग को मजबूत करने के अवसरों और सामरिक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। सभी कमांडरों ने सामूहिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वाणिज्य के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह संवाद इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि सीरिया और लेबनान के सैन्य नेताओं ने अमेरिका के नेतृत्व वाले इस क्षेत्रीय रक्षा सम्मेलन में पहली बार भाग लिया। इससे पहले जनवरी में CENTCOM और क्षेत्रीय देशों ने मध्य पूर्व एयर डिफेंस कोऑर्डिनेशन सेल की स्थापना की थी, जो सूचना साझा करने, खतरे की चेतावनी और संकट प्रतिक्रिया के लिए एक संयुक्त ढांचा प्रदान करता है। अमेरिका और उसके साझेदार मध्य पूर्व में दुनिया का सबसे उन्नत और बड़ा सक्रिय एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।
वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जब ईरान समर्थित समूहों द्वारा लाल सागर और होर्मुज क्षेत्र में उत्पन्न अस्थिरता, इजरायल-हमास संघर्ष के विस्तार और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की चुनौतियां बढ़ रही हैं, यह संवाद अत्यंत प्रासंगिक है। यह दर्शाता है कि पारंपरिक विभाजनों को पार करते हुए एक व्यापक सुरक्षा सहयोग का गठन हो रहा है। सीरिया और लेबनान जैसी जटिल भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले देशों का शामिल होना संकेत देता है कि व्यावहारिक सुरक्षा जरूरतें विचारधारा से ऊपर उठ रही हैं।
भारत की दृष्टि से यह विकास महत्वपूर्ण है। हमारा ऊर्जा आयात, खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय समुदाय और ‘इंडो-पैसिफिक’ से जुड़ी व्यापक रणनीति इस स्थिरता पर निर्भर करती है। बहरीन संवाद साबित करता है कि बहुपक्षीय रक्षा सहयोग ही आधुनिक चुनौतियों का सबसे प्रभावी जवाब है।


