1 जुलाई 2026 को लद्दाख के हेनिस्कोट, बोधखरबू क्षेत्र के निकट श्रीनगर – लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया। भारतीय सेना की फायर & फ्यूरी कोर की ‘Forever in
Operations Division के सैनिकों ने खंगराल पुलिस स्टेशन के सहयोग से त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त वाहन को रेस्क्यू किया। इस त्वरित हस्तक्षेप से न केवल यातायात बहाल हुआ, बल्कि क्षेत्र में आवागमन की निरंतरता भी सुनिश्चित हुई। अत्यधिक ऊंचाई वाले इस दुर्गम इलाके में ऐसी घटनाएं आम हैं, जहां सेना का यह कार्य मात्र सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन की रक्षा का प्रतीक है।
भारतीय सेना की भूमिका हमेशा से बहुआयामी रही है। सीमा पर दुश्मन की घुसपैठ और आक्रामकता का सामना करने के साथ-साथ, प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं और संकट की घड़ी में स्थानीय नागरिकों की मदद करना सेना की परंपरा है। खासकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील व उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में, जहां मौसम और भूगोल दोनों चुनौतीपूर्ण हैं, सेना नागरिक प्रशासन का मजबूत सहारा बन जाती है।
हाल के उदाहरण इस तथ्य को रेखांकित करते हैं। जून 2026 में खरदुंगला टॉप के निकट एक सड़क दुर्घटना में फंसे एक दंपति को सेना के सैनिकों ने तुरंत बचाया और चिकित्सा सहायता प्रदान की। इसी तरह, 2025 में लद्दाख के पांग क्षेत्र में वाहन पलटने की घटना में सेना की फायर & फ्यूरी कोर ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। वर्ष 2025 के दौरान पूरे देश में सेना ने बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी आपदाओं में 28,000 से अधिक नागरिकों को बचाया तथा हजारों को चिकित्सा सहायता दी। कश्मीर में हालिया बचाव अभियानों में सेना, पुलिस और SDRF के संयुक्त प्रयासों ने सैकड़ों जिंदगियों को बचाया।
रणनीतिक दृष्टि से यह दृष्टिकोण ‘Hearts and Minds’ की अवधारणा को मजबूत करता है। दुर्गम क्षेत्रों में सेना की उपस्थिति न केवल सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि विकास कार्यों, चिकित्सा शिविरों और आपातकालीन सहायता के माध्यम से स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास का पुल भी बनाती है। यह नागरिक-सेना संबंधों को मजबूत कर आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाता है।
सेना की ऐसी कार्रवाइयां ‘राष्ट्र पहले’ की भावना का जीवंत उदाहरण हैं। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात हमारे जवान न केवल दुश्मन का सामना करते हैं, बल्कि हर संकट में आम नागरिकों का साथ देते हैं। यह समर्पण ही भारतीय सेना को विश्व की सबसे विश्वसनीय सेनाओं में से एक बनाता है।


