राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और तटरक्षक बल के 105 अधिकारियों एवं जवानों को विशिष्ट सेवा पदकों से सम्मानित किया। इनमें सात सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक उन वीर सैनिकों को प्रदान किए गए, जिन्होंने वास्तविक युद्ध क्षेत्रों में अद्वितीय साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। यह समारोह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था की दृढ़ता और निरंतर सतर्कता का प्रतीक भी है।
समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में अपनी वीरता और रणनीतिक कुशलता का प्रमाण दिया है, उन प्रमुख सम्मानित व्यक्तियों में शामिल थे। इसी प्रकार, सेना प्रमुख-निर्वाचित लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। थलसेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के इन योद्धाओं ने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और समुद्री सुरक्षा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
आज के जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में, जहां LAC पर तनाव, सीमा पार आतंकवाद और समुद्री चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं, ऐसे सम्मान सैन्य मनोबल को अभूतपूर्व ऊर्जा प्रदान करते हैं। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, विशिष्ट सेवा पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बल के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। वे युवा सैनिकों को प्रोत्साहित करते हैं कि कर्तव्य पालन में उत्कृष्टता हासिल करना ही सर्वोच्च सम्मान है। यह परंपरा भारतीय सशस्त्र बलों की पेशेवरता, अनुशासन और राष्ट्र-समर्पण को रेखांकित करती है, जो विश्व स्तर पर उनकी विश्वसनीयता को मजबूत करती है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में इन वीरों के बलिदान और समर्पण को राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति बताया। वास्तव में, ऐसे सम्मान न केवल पुरस्कृत सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हैं, अपितु पूरे देश को याद दिलाते हैं कि हमारी सुरक्षा की पहली पंक्ति में खड़े ये जवान ही हमारी संप्रभुता के सबसे मजबूत संरक्षक हैं।
आधुनिक युद्धनीति में प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी और संयुक्त अभियानों का बढ़ता महत्व देखते हुए, भारत को ऐसे प्रेरित नेतृत्व की जरूरत है। यह समारोह उस दिशा में एक सशक्त कदम है। ‘रक्षा संवाद’ के रूप में हम इन वीरों को शत-शत नमन करते हैं और आशा करते हैं कि उनकी प्रेरणा से नई पीढ़ी और अधिक सशक्त बनेगी।


