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जन्मजात विकृतियों की शीघ्र पहचान एवं प्रबंधन के लिए अभियान 

इन्दौर। बच्चों की जन्मजात विकृतियों की शीघ्र पहचान एवं प्रबंधन के लिए अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान के अन्तर्गत प्रसव केन्द्रों के चिकित्सकों, स्टाफ नर्स एवं ए.एन.एम. को जन्मजात विकृतियों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जीवित प्रसवों में से लगभग ढाई से 3 प्रतिशत बच्चों में विजिबल जन्मजात विकृति की संभावना होती है। क्लेफ्ट लिप, क्लेफ्ट पेलेट, जन्मजात केट्रेक्ट, क्लब फुट, जन्मजात हृदय विकृति, न्यूरल ट्युब डिसऑर्डर, सिर में पानी भरने की समस्या होने पर उसे जन्मजात विकृति की श्रेणी में रखा जाता है। जन्म के समय बच्चों में ऐसे लक्षण दिखने पर उन्हें शीघ्र ही उपचार प्रदान करना आवश्यक होता है। सही समय पर विकृतियों की पहचान कर समस्याओं का प्रबंधन किया जा सकता है।
प्रसव के समय लेबर रूम एवं प्रसव पश्चात देखभाल से जुड़े चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ को इन समस्याओं की पहचान एवं प्रबंधन के लिए उन्मुखीकरण प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात विकृतियों, पौष्टिकता की कमी, बीमारियों एवं विकासात्मक देरी के बच्चों का चिन्हांकन किया जाता है। आर. बी. एस. के. दल द्वारा समुदाय में से ऐसे बच्चों की स्क्रीनिंग कर चिह्नांकित किया जाता है। इन बच्चों को जांच, उपचार एवं थेरेपी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी।

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