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Kishor Biyani: भारत में Modern Retail के “जनक” को क्यों बेचना पड़ा कारोबार ?

Last updated on September 2, 2020

किशोर बियानी…एक ऐसा नाम जिसे भारत में आधुनिक रिटेल का अगुवा या यूं कहें फादर माना जाता है. किशोर बियानी ने आसान शॉपिंग को आम लोगों तक पहुंचाया. फ्यूचर ग्रुप के फ्यूचर रिटेल के जरिए रिटेल बिजनेस का एक पूरा साम्राज्य खड़ा किया. आज 33 साल बाद उनका यह साम्राज्य रिलायंस रिटेल के हाथों में जा रहा है. बियानी, जो 60 की उम्र में प्रवेश कर रहे हैं, उन्हें यहां से एक नई शुरुआत करनी होगी. फ्यूचर ग्रुप का खुदरा व थोक कारोबार और लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग बिजनेस रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) का होने वाला है. इस सौदे का आधिकारिक तौर पर एलान हो चुका है और यह एकमुश्त 24,713 करोड़ रुपये का रहने वाला है.

सौदे के तहत फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशंस का अधिग्रहण भी किया जाएगा. इस सौदे के बाद फ्यूचर ग्रुप के बिग बाजार, एफबीबी, ईजीडे जैसे स्टोर रिलायंस रिटेल के हो जाएंगे. 26 साल की उम्र में खोला पैंटालून स्टोर :- किशोर बियानी का जन्म 1961 में मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी के घर हुआ. उन्होंने अपना सफर 1980 के दशक में मुंबई में स्टोन वॉश डेनिम फैब्रिक को बेचने से शुरू किया था. उन्होंने 1987 में Erstwhile Manz Wear नाम से रिटेल बिजनेस शुरू किया. कुछ ही वक्त बाद इसका नाम बदलकर पेंटालून कर दिया गया. बियानी ने 26 साल की उम्र में कोलकाता में पहला पैंटालून्स स्टोर खोला था. 1992 में पेंटालून स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुआ ताकि विस्तार, स्टोर बेहतर बनाने और मार्केटिंग के लिए पैसा जुटाया जा सके. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा क्योंकि उन्होंने रिटेल का एक पूरा इकोसिस्टम बना दिया था. साथ ही उन्होंने कई अन्य एंटरप्रेन्योर्स व ब्रांड्स को मेंटोर भी किया. 2001 में पहला बिग बाजार स्टोर :- 2001 में फ्यूचर ग्रुप ने भारत में पहला बिग बाजार स्टोर खोला. यह इतना ज्यादा पॉपुलर हुआ कि 6 साल के अंदर पूरे भारत में इसके लगभग 100 स्टोर हो गए. 2007 में बियानी के फ्यूचर ग्रुप ने इंश्योरेंस सेक्टर में भी कदम रखा और फ्यूचर जनरल इंश्योरेंस लॉन्च किया. उसी साल फ्यूचर कैपिटल भी अस्तित्व में आई, जो वित्तीय उत्पाद, वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज, इक्विटी ब्रोकिंग सॉल्युशंस और रियल एस्टेट ब्रोकिंग की पेशकश करती है. फ्यूचर ग्रुप ने रियल एस्टेट में भी एंट्री की. जैसे-जैसे वक्त बीता रिटेल मार्केट में अन्य कॉम्पिटीटर उतरने लगे. उनमें से एक रिलायंस रिटेल भी थी. साथ ही ई-कॉमर्स ने भी एंट्री की, जिसे शुरुआत में बियानी ने चैलेंजर ही नहीं माना. 2008 की आर्थिक मंदी के बाद कंपनी के कारोबार पर काफी बुरा असर हुआ. धीरे-धीरे कर्ज का बोझ बढ़ता गया. अपने रिटेल एंपायर से कर्ज को बोझ को कम करने के लिए कई बार बियानी को एसेट्स को डाइवेस्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा. 2012 में बेची पैंटालून्स की अधिकांश हिस्सेदारी :- साल 2012 में उन्होंने पैंटालून्स चेन में अपनी अधिकांश हिस्सेदारी आदित्य बिड़ला नुवो को बेची. यह सौदा 1600 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें 800 करोड़ रुपये का डेट ट्रांसफर शामिल रहा. 2012 में ही फिर से पैसा जुटाने के लिए बियानी ने फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग्स में भी अधिकांश हिस्सेदारी अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी Warburg Pincus को बेच दी. साथ ही अमेरिका की स्टैपल्स के साथ शुरू किए गए एक स्टेशनरी ज्वॉइंट वेंचर में से पूरी हिस्सेदारी पार्टनर फर्म को बेच बाहर निकल गए. उस वक्त उनका ग्रुप लगभग 5000 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था. इसी तरह 2013 में फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन लिमिटेड ने एथनिक वियर फर्म बीबा अपैरल्स और डिजायनर अनीता डोंगरे के स्वामित्व वाली AND में 450 करोड़ रुपये में माइनॉरिटी हिस्सेदारी बेची. अगस्त 2019 में किशोर बियानी ने फ्यूचर कूपन्स में 49 फीसदी हिस्सेदारी Amazon.Com NV Investment Holdings LLC. को बेची. फ्यूचर रिटेल में फ्यूचर कूपन्स की हिस्सेदारी 7.3 फीसदी है. इस साल से बढ़ा वित्तीय संकट :- बियानी का फ्यूचर ग्रुप इस साल की शुरुआत में तब वित्तीय संकट में आया, जब उनकी लिस्टेड एंटिटी फ्यूचर रिटेल डेट रिपेमेंट में असफल हो गई और कर्जदाताओं ने शेयरों को गिरवीं रखने की बात कही. 2019 में 13,016 करोड़ रुपये के साथ फोर्ब्स की लिस्ट में 80वें सबसे अमीर भारतीय बनने वाले किशोर बियानी के लिए यह बहुत बड़ा झटका था. इस वाकये के बाद स्टैंडर्ड एंड पूअर्स व फिच समेत कई रेटिंग एजेंसियों ने फ्यूचर रिटेल की क्रेडिट रेटिंग्स को डाउनग्रेड कर दिया. कुछ रिपोर्ट की मानें तो फ्यूचर ग्रुप इस वक्त 13000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है और प्रमोटर ग्रुप के अधिकतर शेयर गिरवीं हैं. रिलायंस रिटेल से सौदे के बाद क्या? :- रिलायंस रिटेल के साथ हुए सौदे के बाद फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड एफएमसीजी सामान की मैन्युफैक्चरिंग व डिस्ट्रीब्यूशन और इंटीग्रेटेड फैशन सोर्सिंग व मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस को बरकरार रखेगी. साथ ही Generali के साथ अपने इंश्योरेंस ज्वॉइंट वेंचर और NTC Mills के साथ ज्वॉइंट वेंचर को भी बरकरार रखेगी.

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