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पूर्णाहुति के साथ नवनिर्मित मंदिर में विराजित हुई सांई बाबा की मूर्ति, लगे सांई राम-सांई श्याम के जयकारे 

हनुमान व भगवान गणेश की मूर्तियां भी हुई विराजित, हवन कुंड में भक्तों के साथ-साथ रहवासियों ने भी दी आहुतियां 

इन्दौर। सुखलिया स्थित लवकुश आवास विहार में नवनिर्मित मंदिर में सांई बाबा, हनुमान एवं भगवान गणेश की मूर्तियां विराजित की गई। विद्वान पंडि़तों के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोउच्चार के बीच सुबह हवन पूजन की विधियां संपन्न हुई तो वहीं शाम को भजन संध्या एवं महाप्रसादी का आयोजन किया गया।
देर शाम शुरू हुई भजन संध्या में सैकड़ों श्रद्धालुओं और भक्तों ने प्रसिद्ध भजन गायकों के भजनों पर झूमकर ऐसा रंग जमाया की वहां उपस्थित सभी भक्त आनंदित हो उठे। वहीं 8000 हजार से अधिक भक्तों ने महाप्रसादी भी समापन अवसर पर ग्रहण की।
लवकुश आवास विहार सांई बाबा मंदिर समिति अध्यक्ष चन्द्रकांत कुंजीर, मिलिंद दीघे ने बताया कि सुखलिया स्थित लवकुश आवास विहार में बने नवनिर्मित सांई मंदिर में बाबा की मूर्ति व भगवान गणेश एवं हनुमान की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव गुरूवार को संपन्न हुआ।
सुबह यजमान परिवार सुरेश-चेतना चौधरी एवं निहारिका कुंजीर सांईनाथ महाराज, हनुमान एवं भगवान गणेश की मूर्ति का पूजन किया। इसके पश्चात मूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में विराजित किया गया। हवन कुंड में सैकड़ों भक्तों ने आहुतियां देकर सभी के लिए सुख, समृद्धि की मंगल कामना भी की। वहीं इस अवसर पर सांई राम-सांई श्याम के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन अवसर पर चंदूराव शिंदे, दिलीप श्रीवास्तव, रेखा कुंजीर, रवि मिश्रा, रमेश बैस, राजकुमारी शर्मा, अशोक शर्मा, सुरेश चौधरी, चेतना चौधरी, सरोज रघुवंशी, रेखा पंवार, विनिता पाठक, चन्द्रकांत पराड़कर, दत्तात्रेय घोड़ गांवकर, श्याम सुंदर शर्मा, अंकुश घोसले, अमृतसिंह यादव, रमेश बेस, बबलू लाडगे, शकुंतला निम्बालकर, शुभम माणे, मधुकर दुबे, मधुकर बुधे सहित सैकड़ों की संख्या में रहवासी व भक्त शामिल हुए थे।

भजन संध्या में झूमे भक्त 
तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें भजन गायकों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे सुखलिया क्षेत्र को सांईमय कर दिया।
वहीं शाम को भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। जिसमें 8000 हजार से अधिक भक्तों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।

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