रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई। 28 सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के सदस्यों द्वारा संचालित यह मोटरसाइकिल अभियान कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास (लद्दाख) पहुंचेगा। ‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’ के मंत्र के साथ यह यात्रा 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है।
लगभग 1900 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण हिमालयी यात्रा 26 जुलाई को विजय दिवस पर समाप्त होगी, जब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी का कलश द्रास में अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने इसे शहीदों की गाथाओं को जीवंत रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने युवाओं को उच्च ऊंचाई वाले युद्ध की वीरता की कहानियों से प्रेरित करने पर जोर दिया। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वाई.के. जोशी जैसे वेटरन इस यात्रा को उन कठिन परिस्थितियों की याद दिलाते हैं, जहां भारतीय सैनिकों ने 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और बर्फीली ठंड में दुश्मन के कब्जे वाले शिखरों को वापस जीता था।
यह यात्रा मात्र स्मृति नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। कारगिल संघर्ष ने साबित किया कि भौगोलिक चुनौतियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों के बावजूद, सैनिकों की वीरता और नेतृत्व ही निर्णायक साबित होते हैं। आज जब भारत सीमाओं पर बहुआयामी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसी पहलें राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती हैं और युवा पीढ़ी को सैन्य मूल्यों से जोड़ती हैं। यात्रा मार्ग में विभिन्न युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि और वीर नारियों से संवाद इसका भावनात्मक आयाम और गहरा बनाएगा।


