ईरान-अमेरिका की बचकानी टकराहट: पूरी दुनिया चूका रही इसकी कीमत

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई सैन्य टकराहट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अमेरिका जैसी महाशक्ति की कथित रणनीतिक परिपक्वता कभी-कभी बचकानी जिद में बदल जाती है। अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने स्ट्रेट ऑफ हरमुज के निकट लगभग 10 ईरानी सैन्य ठिकानों, मिसाइल-ड्रोन भंडारण सुविधाएं, तटीय राडार स्टेशन, वायु रक्षा प्रणालियां और माइनलेयर क्षमताओं, पर हमले किए। यह कार्रवाई ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा पनामा-ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी किकू पर ड्रोन हमले के जवाब में की गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों की घोषणा करते हुए युद्धविराम उल्लंघन पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी।

ईरान ने भी जवाबी हमले किए, उसने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन के मिना सलमान पोर्ट स्थित अमेरिकी पांचवीं बेड़े पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जिससे एयर रेड सायरन बज उठे और इंटरसेप्शन सिस्टम सक्रिय हो गए। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस टकराहट का असली खामियाजा वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम नागरिक उठा रहे हैं।

तेल परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण पैसेज, स्ट्रेट ऑफ हरमुज, के आसपास की अस्थिरता ने तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग बीमा लागत में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पैदा कर दिया है। विकासशील देशों में ऊर्जा महंगाई बढ़ रही है, जबकि मध्य पूर्व में पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र और अस्थिर हो गया है। दोनों देशों की यह जिद वैश्विक सुरक्षा वास्तुकला के लिए गंभीर खतरा है। ईरान अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा और अमेरिका अपनी वैश्विक वर्चस्व की रक्षा के नाम पर ऐसी कार्रवाइयों में जुटा है, जिसका कोई रणनीतिक परिपक्वता नहीं दिखती।

दुनिया को इस बचकानी लड़ाई से बचना चाहिए। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खाड़ी पर निर्भर हैं, को कूटनीतिक प्रयास तेज करने चाहिए। संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय मंचों पर संयम की अपील जरूरी है। महाशक्तियों को याद रखना चाहिए कि युद्ध का खेल बच्चों का नहीं होता, इसकी कीमत पूरी मानवता चुकाती है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families