टांग्से (लद्दाख)
फायर एंड फ्यूरी कोर (14वीं कोर) ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत टांग्से में एक आधुनिक पुस्तकालय का निर्माण किया जिसका उद्घाटन स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। चांगथांग जिले के डिप्टी कमिश्नर नितीश राजोरा (आईएएस) की उपस्थिति में समर्पित यह पुस्तकालय लगभग 1500 पुस्तकों तथा आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित है। यह पहल स्थानीय छात्रों और निवासियों को, विशेष रूप से कठोर शीतकाल में, पढ़ाई और ज्ञानार्जन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगी।
यह पुस्तकालय केवल इमारत नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। लद्दाख की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और कठिन मौसम में शिक्षा तक पहुंच सीमित रहती है। सेना की इस पहल से युवा पीढ़ी को विश्व स्तरीय ज्ञान संसाधनों तक पहुंच मिलेगी, जो उनके व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रगति में भी योगदान देगी। स्थानीय जनता, खासकर युवा वर्ग ने सेना की इस पहल का ह्रदय से स्वागत किया और सैन्य अधिकारियौं का आभार व्यक्त किया।
ऑपरेशन सद्भावना: इतिहास और अवधारणा
ऑपरेशन सद्भावना 1998 में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा शुरू की गई एक अभिनव पहल है। आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों, पुलों और बुनियादी ढांचे के विनाश के बाद, सेना ने ‘विनिंग हार्ट्स एंड माइंड्स’ (WHAM) की रणनीति अपनाई। इसका उद्देश्य स्थानीय जनता के साथ विश्वास का पुल बनाना, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना और विकास की राह दिखाना था।
पिछले 28 वर्षों में इस ऑपरेशन के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये व्यय कर शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और युवा उत्थान की अनेक परियोजनाएं चलाई गईं। आर्मी गुडविल स्कूलों में हजारों छात्र पढ़ रहे हैं। चिकित्सा शिविर, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, शैक्षणिक भ्रमण और खेल कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं। लद्दाख सहित पूरे क्षेत्र में यह अभियान स्थानीय समुदायों के लिए विश्वास और आशा का प्रतीक बन गया है।
सीमाओं की रक्षा और जन-सेवा
भारतीय सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि देश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों, खासकर युवाओं को सशक्त बनाने का दायित्व भी निभाती है। टांग्से पुस्तकालय इसी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक विकास के बीच सामंजस्य स्थापित कर सेना ‘राष्ट्र पहले’ के मंत्र को चरितार्थ कर रही है।
ऐसी पहलें न केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करती हैं, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी प्रोत्साहित करती हैं।


