राजौरी के पहाड़ी इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर साबित किया कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भारतीय सेना कितनी विश्वसनीय ढाल बन सकती है। व्हाइट नाइट कोर के जवान, जम्मू-कश्मीर पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के साथ पूर्ण समन्वय में, जीवनरक्षक अभियान चला कर 11 नागरिकों, जिनमें पाँच बच्चे शामिल हैं, को मौत के मुंह से बचा लिया। यह अभियान न केवल साहस की मिसाल है, बल्कि सैन्य-नागरिक सहयोग की उत्कृष्ट कड़ी भी।
घटनाक्रम के अनुसार, थानामंडी के दक्षिण में चुरुंग गांव के पास एक नाले में बाढ़ के तेज बहाव में नौ लोग फंस गए थे। वहीं, नौशेरा तवी नदी के द्वीप पर दो युवा पानी के घेरे में फंस गए थे। खतरनाक जल-स्तर, तेज धारा और कीचड़ भरी स्थिति के बावजूद व्हाइट नाइट कोर के सैनिकों ने तुरंत रेस्क्यू टीम उतारी। बिना किसी हिचकिचाहट के उन्होंने स्विफ्ट वाटर रेस्क्यू तकनीकों का इस्तेमाल कर सभी को सुरक्षित निकाला। इस पूरे अभियान में किसी भी जान की हानि नहीं हुई, जो सैनिकों की पेशेवर तैयारी, नेतृत्व और टीम वर्क का प्रमाण है।
राजौरी-पुंछ क्षेत्र सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है। यहां भारतीय सेना न केवल सीमा सुरक्षा करती है, बल्कि ‘सिविक एक्शन’ और ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) अभियानों के माध्यम से स्थानीय जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बनाती है। व्हाइट नाइट कोर का यह त्वरित प्रतिक्रिया मॉडल दर्शाता है कि आधुनिक सैन्य बल कैसे बहुआयामी भूमिकाएं निभा सकता है, युद्धकालीन तैयारी के साथ-साथ शांति काल में भी नागरिकों की रक्षा।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि भारतीय सेना ‘लोगों के साथ, लोगों के लिए’ के सिद्धांत पर चलती है। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या किसी अन्य आपदा में सेना का आगमन ही स्थानीय लोगों के मन में आश्वासन भर देता है। व्हाइट नाइट कोर के इन जवानों को बधाई। उनकी यह कार्रवाई न केवल प्रोफेशनलिज्म की मिसाल है, बल्कि ‘राष्ट्र पहले, हमेशा’ की भावना का जीवंत उदाहरण भी।
ऐसे अभियान सेना की छवि को और मजबूत करते हैं तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता को पुख्ता बनाते हैं। रक्षा बलों की इस तत्परता पर पूरा देश गर्व कर सकता है।


