कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने 11 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी का ऑफशोर पेट्रोल वेसल (एनजीओपीवी) ‘श्रुति’ का जलावतरण किया। यह जीआरएसई द्वारा निर्मित श्रृंखला का दूसरा जहाज है। इससे पहले मई में ‘संघमित्रा’ का जलावतरण हो चुका था। यह आयोजन नौसेना की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है।
लगभग 3,000 टन विस्थापन वाले इस जहाज में 85 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह अधिकतम 23 नॉट की गति हासिल कर सकता है और 8,500 समुद्री मील तक की दूरी तय करने में सक्षम है। समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, समुद्री डकैती विरोधी अभियान तथा आपदा राहत जैसे बहुआयामी कार्यों के लिए तैयार यह पोत नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेगा। इसका नाम भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा ‘श्रुति’ अर्थात् वेदों से लिया गया है, जो आधुनिक सैन्य शक्ति को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है।
रणनीतिक दृष्टि से यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों, ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा और अपतटीय परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए नौसेना को लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले सक्षम प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है। ‘श्रुति’ जैसी इकाइयाँ न केवल निगरानी और प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ाएँगी, बल्कि आपदा के समय मानवीय सहायता प्रदान करने में भी प्रभावी सिद्ध होंगी।
यह जलावतरण ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जब देश अपने रक्षा प्लेटफॉर्म स्वयं बनाता है, तो यह न केवल विदेशी निर्भरता घटाता है, बल्कि रणनीतिक स्वतंत्रता और औद्योगिक आधार दोनों को मजबूत करता है। भारतीय नौसेना की यह यात्रा स्पष्ट करती है कि समुद्री शक्ति अब केवल रक्षा का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता का आधार बन चुकी है।


