मध्य पूर्व का महासंग्राम, वैश्विक रक्षा परिदृश्य और भारत पर प्रभाव

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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मध्य पूर्व में सैन्य तनाव अब अपने विकराल रूप में पहुँच चुका है। अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों पर नए सिरे से किए गए हवाई हमलों और जवाब में ईरान समर्थित गुटों द्वारा सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे पर किए गए ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की अग्नि को और भड़का दिया है।

यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है। भू-राजनीतिक समीकरणों के कारण दुनिया के अन्य प्रमुख राष्ट्र भी अपने-अपने हितों के अनुसार ईरान या अमेरिका के पक्ष में खड़े होने को मजबूर हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर शक्ति-संतुलन बिगड़ने से एक नए ‘कोल्ड वॉर’ और वैश्विक सुरक्षा संकट की आहट साफ सुनी जा सकती है।

इस सैन्य वृद्धि का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव एक व्यापक हथियारों की होड़ (Arms Race) के रूप में सामने आ रहा है। जब-जब सीमाएं सुलगती हैं, तब-तब रक्षा सामग्री, उन्नत हथियारों और गोला-बारूद की मांग में अभूतपूर्व उछाल आता है। इस स्थिति का आर्थिक लाभ उन देशों को मिल रहा है जो उन्नत रक्षा निर्माण (Defence Manufacturing) के क्षेत्र में अग्रणी हैं। अमेरिका, तुर्की और भारत जैसे देश, जो अपनी रक्षा निर्माण क्षमताओं को लगातार सशक्त बना रहे हैं, इस बढ़ती वैश्विक मांग की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारत का हाल ही के वर्षों में शुरू किया गया ‘मेक इन इंडिया’ कैंपेन ऐसी परिस्थितियों में देश के बहुत काम आएगा क्योंकि आज भारत में सैकड़ों छोटे- बड़े उपक्रम शुरू हो चुके हैं जो हथियार या अन्य रक्षा उपकरण बनाने में महारत हासिल कर चुके हैं। हालांकि किसी के विनाश से भारत को फायदा मिले, ये हम कभी नहीं चाहेंगे पर ये भी सच है कि वर्तमान दौर में चल रहे युद्धों के कारण भारत के उन समस्त उद्यमियों व स्टार्टअप्स को अपने पैर इस क्षेत्र में जमाने का भरपूर मौका मिलेगा।

वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखें तो यह संकट अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। यूरेशिया से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक देश अपनी रक्षा प्राथमिकताओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। यदि कूटनीतिक रास्तों को तुरंत प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक ऐसे वैश्विक संकट में तब्दील हो सकता है, जिसकी कीमत संपूर्ण विश्व को चुकानी पड़ेगी।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families