भारतीय नौसेना की पूर्वी बेड़ा टुकड़ी के जहाज युद्धपोत उदयगिरि, रसद पोत शक्ति और कोरवेट कावरत्ती, रियर एडमिरल अलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट (FOCEF) के नेतृत्व में थाईलैंड के सत्ता हिप बंदरगाह पहुंचे हैं। यह दौरा मात्र एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति का एक महत्वपूर्ण कदम है जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगी सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य रॉयल थाई नौसेना के साथ अंतर-संचालन क्षमता (interoperability) को बढ़ाना, व्यावसायिक सहयोग को गहरा करना तथा दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच बेहतर समझ विकसित करना है। इसके अंतर्गत संयुक्त अभियान, खेल गतिविधियां और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये गतिविधियां न केवल तकनीकी आदान-प्रदान सुनिश्चित करेंगी, बल्कि आपसी विश्वास को भी मजबूत करेंगी।
यह बंदरगाह मीटिंग भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘MAHA-SAGAR’ (Mutual and Holistic Assistance and Security for Growth in the Region) दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। थाईलैंड के साथ यह सहयोग आसियान देशों के साथ भारत के समुद्री संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है, खासकर वर्ष 2026 को ‘ASEAN-India Year of Maritime Cooperation’ घोषित किए जाने के संदर्भ में। हिंद-प्रशांत में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों के बीच भारत और थाईलैंड जैसे साझेदार देशों का यह समन्वय अत्यंत प्रासंगिक है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना की ऐसी नियमित तैनातियां न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत (FOIP) की अवधारणा को व्यावहारिक रूप भी देती हैं। रियर एडमिरल अलोक आनंद के नेतृत्व वाली इस टुकड़ी का दौरा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे नौसैनिक संबंधों को नई गति प्रदान करेगा।
भारत की समुद्री क्षमता और कूटनीतिक परिपक्वता का यह प्रदर्शन क्षेत्रीय शांति तथा समृद्धि के लिए एक सकारात्मक संदेश है। रक्षा सम्वाद स्तंभ की दृष्टि में, ऐसे सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि बहुपक्षीय सुरक्षा वास्तुकला को भी मजबूती प्रदान करते हैं।


