भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति: मेघालय में होने वाले युद्ध अभ्यास “प्रगति” में पहली बार जुड़ेंगी 12 पूर्वी देशों की सेनाएं

Dr Rajesh Jauhri
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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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हिन्द महासागर क्षेत्र (IOR) में रक्षा कूटनीति को नई गति प्रदान करते हुए भारतीय सेना 18 से 31 मई 2026 तक उमरई (मेघालय) स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास “प्रगति” का प्रथम संस्करण आयोजित करने जा रही है। इस अभ्यास में 11 मित्र राष्ट्रों के सैन्य दलों की भागीदारी होगी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

‘प्रगति’ (PRAGATI) का पूरा नाम ‘Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region’ है। यह क्षेत्रीय स्थिरता, अंतर-संचालन क्षमता और आपसी क्षमता निर्माण के साझा विजन का प्रतीक है। भूटान, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के सैन्य दल भारतीय सेना के साथ इस अभ्यास में शामिल होंगे। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत कुछ अन्य देशों को भी आमंत्रित किया गया है।

उत्तर-पूर्व भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण उमरई फॉरेन ट्रेनिंग नोड पर आयोजित होने वाला यह पहला बहुराष्ट्रीय अभ्यास है। इस नोड ने पहले थाईलैंड के साथ द्विपक्षीय अभ्यास ‘मैत्री’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया है। दो सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य सैन्य दलों के बीच परिचालन समन्वय बढ़ाना, आपसी विश्वास निर्माण करना तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों, जंगल युद्ध और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है। ये कौशल भारतीय महासागर क्षेत्र में साझा चुनौतियों, आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाओं और समुद्री सुरक्षा, से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि “प्रगति” भारत की व्यापक सामरिक नीतियों के अनुरूप एक समयोचित पहल है। पड़ोसी देशों और प्रमुख हिंद महासागरीय साझेदारों के साथ जुड़कर भारत क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला को अधिक एकीकृत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यह अभ्यास केवल सामरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक सैन्य साझेदारियों को बढ़ावा देता है।

अभ्यास की एक खास विशेषता 30-31 मई को FICCI और भारतीय सेना के डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से आयोजित होने वाला ‘रक्षा उद्योग प्रदर्शनी’ होगी। इसमें स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों और उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे भाग लेने वाले देशों को सहयोग और अधिग्रहण के नए अवसर मिलेंगे।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर बढ़ते वैश्विक ध्यान के बीच अभ्यास ‘प्रगति’ भारत की ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ भूमिका को मजबूत करता है। सैन्य स्तर पर व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से भारतीय सेना न केवल परिचालन तैयारियों को बढ़ा रही है, बल्कि स्थिर और समृद्ध भारतीय महासागर क्षेत्र के निर्माण में भी योगदान दे रही है।

‘प्रगति’ के इस पहले संस्करण को भविष्य में और विस्तार देने तथा सहयोग को गहरा बनाने की नींव माना जा रहा है। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी के अनुसार, ऐसे मंच द्विपक्षीय सद्भावना को सामूहिक शक्ति में बदलते हैं, जो 21वीं सदी की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families